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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 67, अगस्त(द्वितीय), 2019

अश्क बहाते नजर आएंगे

राजीव डोगरा

बहते अश्कों के साथ अश्क बहाते नजर आएंगे। बदलते चेहरों के साथ हम भी बदलते नजर आएंगे। सुकून नहीं मिला भले इस दुनिया से फिर भी हंसते मुस्काते हम अब नजर आएंगे। बेदर्द कातिल की तरह मुझे दर्द दिया है इस दुनिया ने फिर भी सब का हमदर्द बन हम नजर आएंगे। छोड़ने वालों ने तो साथ छोड़ दिया हमारा मगर हम भी दिल से निभाने वालों का साथ निभाते नजर आएंगे।


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