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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 67, अगस्त(द्वितीय), 2019

प्रजातंत्र

हरदीप सबरवाल

(1) सजे हुए मेले में खाली जेब में हाथ डाल वो बच्चे, देख रहे हैं, विशाल झूले, रंग बिरंगी झांकियां अपनी अपनी सर्कस की तरफ आकर्षित करते जोकर खाने पीने की मिठाइयां और पेय के दिए गए लालच, एक दिन के मेले के शहंशाह से इतराते चीथडों में वो फिर भी खाली जेब, खाली पेट, नंगे तन वे लौट आए घर इस खुशी के साथ कि वो ही तो मेले को आगे बढ़ाने वाले है, और सारा मुनाफा काट गए मेले के वो आयोजक (2) मधुमक्खियों के छत्ते के पेड़ पर तीन भालू एक दूसरे का डर दिखाते कि वो लूट ना ले कहीं सारा शहद तभी एक भालू ने समझा दिया सभी मधुमक्खियों को कि बाकी दोनों मिले हुऐ हैं, दूसरे पेड़ के छत्ते की मधुमक्खियों से, डरी सहमी सारी मधुमक्खियों ने सीख ली राष्ट्रभक्ति और सारा शहद देशभक्त भालू को दे दिया चाटने के लिए……


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