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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



कौन छुआ ऊंचा शिखर


सुशील यादव


 		 
कौन छुआ ऊंचा शिखर,कौन हुआ भयभीत
समय-समय की बात है ,समय-समय की प्रीत
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ज्ञान गणित के फेल हैं ,फेल जोड़ औ भाग
राजनीति की मिर्च से ,लगती है जो आग
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नींद भरी थी आँख में,खुला रहा लंगोट
कोई तपसी दे गया ,जी भर पीछे चोट
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फूटे करम बिहार के,आग लगी कंदील
किसको सूझे देखना ,पैरों कांटे कील
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थूक-थूक के चाटना, आज यही है रीत
सत्ता-कुर्सी चाह की ,घुटन भरी है प्रीत
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अपने मकसद पास वो,बाकी दुनिया फेल
रखता जला मशालची ,खून पसीना तेल
 

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