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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



मुक्तक


नीतू शर्मा


फ़रेबी लोग ऐसे है, कि पल-भर में बदल जाते

जिगर जिनके बने पत्थर, भला कैसे पिघल जाते 

महक पाई सुमन से तो, करों में भी चुभे कांटे

मिले कोई गुलिस्तां भी, बिना देखे निकल जाते ।

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