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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



रेणु


चाँदनी सेठी कोचर


रेणु की काम वाली उसके घर में पिछले 4 साल से काम कर रही थी, इसलिये रेणु उसको अच्छे से भी जानती थी। आज रेणु की काम वाली जिसका नाम सुनीता है , उसको आने में थोड़ी देरी क्या हो गई, रेणु उस पर चिल्लाने लगी कि

" क्या बात है सुनीता आज तुम लेट क्यु आई हो , तुम्हें पता भी है, कितना काम बाकि है अभी, ऊपर से तुम भी लेट आने लगी हो।"

इतना सुनते ही , सुनीता जल्दी से अपने काम में लग गई, और साथ ही साथ और माफ़ी मागने लगी कि

"दीदी कल से ऐसा नहीं होगा "

लेकिन रेणु तो पता नही, आज किस बात का गुस्सा सुनीता पर निकल रही थी ! यह बात तो शायद आज रेणु भी खुद समझ नही पा रही थी।

इतने मे रेणु का पति वह आकर रेणु को किसी बात पर सुनने लगा कि

" क्या करती हो तुम सारा दिन घर पर, मेरे जूते और कपड़े वैसे के वैसे ही गंदे पड़े है, मैंने कल भी तुम्हे समझाया था, कि मेरा काम समय पर हो जाना चाहिए , लेकिन तुम कोई बात सुनती ही कब हो"

इतना कह कर रेणु का पति वहाँ से चला जाता हैं।

और सुनीता को भी समझ आ जाता है, कि क्यूँ उसकी दीदी आज उस पर गुस्सा कर रही है ।


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