Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



माता गंगा


लवनीत मिश्र


 
मै गंगा जग की माता,
पर नही मेरा सम्मान, 
केवल जल का साधन समझे,
यह अधम इंसान, 
दुर्गम पथ के कष्ट सहकर,
अपनी राह बनाऊ,
नगर नगर, हर गांव गांव, 
जन जन की प्यास बुझाऊ,
फिर भी मेरा मोल नही,
करते सदा अपमान,
मल मूत्र दूषित वस्तु से,
करते मेरा सम्मान, 
दया नही इस कलयुग मे,
मानव अब तेरे अंदर,
पथ भ्रमित दूषित बुद्धि को, 
स्वार्थ दिखे अब हर पल। 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें