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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



वोटों का मौसम है आया


धर्मेन्द्र अरोड़ा


वोटों का मौसम है आया 
संग अपने नेता जी लाया 
वादे करके मीठे - मीठे
भोली जनता को भरमाया 
बस कुरसी की खातिर सबने 
भाई  - भाई को लड़वाया 
कौन है अपना कौन पराया 
मन बेचारा जान न पाया 
साम-दाम और दंड-भेद का 
चहुंओर ही जाल बिछाया 
जात-पात का भ्रम फैलाकर 
आपस में सबको लड़वाया 
प्रेम-भाव और नैतिकता को 
खुद से कोसों दूर भगाया 
वाह रे मेरे देश का मानव 
समझ सका न इनकी माया
          

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