Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



उपहास न करें


रवीन्द्र दास


                         
वे जो करें वो ठीक है बकवास न करें
शीशा दिखा के इस तरह उपहास न करें

दुश्मन हुए हैं दोस्त अभी आपकी क़सम
इनके कहे पे इन दिनों विश्वास न करें

चमचागिरी नहीं है इसे शौक समझिए
बाजा बजाके ज़ुर्म कोई ख़ास न करें

खीसें निपोड़िए या सहलाइए घुटने
गिरे हुए से ख़ुद में अहसास न करें

ये भी कमाल है के दुनिया कमाल है
बातें बढ़ा चढ़ा कर अब 'दास' न करें
   

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें