Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



देखता है राह किसकी


रवीन्द्र दास


                         
देखता है राह किसकी 
अब बची है चाह किसकी
 
धमनियों की धड़कनें सुन 
सुन जरा अफ़वाह किसकी 

है लहू ठंडा पड़ा तो 
उठ रही है दाह किसकी 

झूमते हों सब नशे में 
कौन सुनता आह किसकी 

दास नंगों के शहर में 
कौन देखे जाह* किसकी

*इज्जत, प्रतिष्ठा
   

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें