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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



बरखा रानी.....


उमाशंकर सैनी


    
बरखा रानी बड़ी सयानी,
तुम तो हो जीवन-दानी  ।
 
बरखा रानी जोर के बरसे,
तो मोर नाचते हैं मनसे ।
 
बादलों की, कर-दो गड़-गड़ाहट
मानसून की तुम दे-दो आहट ।
 
बिजली की चमका-दो चम-चम,
भीगने को करे, फिर सबका मन ।
 
अब न देर करो तुम, बरखा सियानी,
नदी तालाब भर दो, जल्दी से रानी। 

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