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वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



परिचय


प्रो. डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा


  
प्रो. डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा                                                                                                    
जन्म : उज्जैन [म.प्र.]
शिक्षा : बी.एससी.  एम. ए.(हिंदी)-स्वर्णपदकलब्ध , एम.फिल.,पीएच. डी., यू.जी.सी.- नेट 
संप्रति : प्रोफेसर एवं कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन [म.प्र.]
आचार्य एवं चेयरमैन, हिंदी अध्ययन मण्डल, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय,
उज्जैन [म.प्र .] के हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए अनेक नवाचारी प्रयत्न , जिनमें विश्व 
हिंदी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र, मालवी लोक साहित्य एवं संस्कृति केन्द्र तथा भारतीय जनजातीय 
साहित्य एवं संस्कृति केन्द्र की संकल्पना एवं स्थापना प्रमुख हैं।
मुख्यतः आलोचना ,रंगमंच,लोक- साहित्य और संस्कृति, राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं देवनागरी लिपि से जुडे 
शोध एवं लेखन में विगत तीन दशकों से सक्रिय।
प्रकाशित कृतियाँ :  30 ,जिनमें  प्रमुख हैं -  शब्दशक्ति सम्बन्धी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा 
तथा हिंदी काव्यशास्त्र , मालवा का लोक-नाट्य माच और अन्य विधाएं , अवन्ती क्षेत्र और सिंहस्थ 
महापर्व, मालवसुत पं. सूर्यनारायण व्यास,हरियाले आँचल का हरकारा:हरीश निगम,आचार्य नित्यानंद शास्त्री 
और रामकथा कल्पलता,   देवनागरी विमर्श , मालव मनोहर , हिंदी भाषा संरचना , हरदिल अजीज भगवती 
शर्मा, सोंधवाडी साहित्य,संस्कृति और व्याकरण,मालवी भाषा और साहित्य,लोककवि झलक निगम,हरीश प्रधान:
व्यक्ति और काव्य,ज्ञानसेतु, झालावाड़:इतिहास, संस्कृति और पर्यटन , झालावाड़ की मूर्तिकला परंपरा ,पीयूषिका 
आदि.  
विविध विषयों पर ढाई सौ से अधिक शोध एवं समीक्षापरक निबंधों का प्रकाशन. देश-विदेश  के प्रमुख पत्र -
पत्रिकाओं में  850 से अधिक आलेख ,समीक्षा आदि का प्रकाशन.      
पुरस्कार/सम्मान : साहित्य सिंधु सम्मान, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया,  संतोष तिवारी समीक्षा सम्मान ,आचार्य हजारीप्रसाद 
द्विवेदी राष्ट्रीय सम्मान ,आलोचना भूषण सम्मान, साहित्य मार्तंड सम्मान, शब्द साहित्य  सम्मान, शातिदूत - 
संस्कृति और शांति अवार्ड, हिन्दी भाषा भूषण, राष्ट्रीय कबीर  सम्मान, विश्व हिन्दी सेवा  सम्मान  , राष्ट्रभाषा 
सेवा  सम्मान, अक्षरादित्य सम्मान,हिन्दी सेवी सम्मान, राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, आदि .
बीस से अधिक राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर की  संगोष्ठियों का समन्वय .
संपर्क : आचार्य एवं संस्थापक -समन्वयक,विश्व हिंदी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र, हिंदी अध्ययनशाला, 
विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन [म.प्र.] 456010 
निवास : सृजन 407, साईनाथ कॉलोनी
सेठी नगर, उज्जैन [म.प्र.] 456010 
मोबाईल : 098260-47765 , निवास : 0734-2515573 
ई मेल : shailendrasharma1966@gmail.com
blogs : http://drshailendrasharma.blogspot.com
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विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केन्द्र : एक परिचय

विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन की हिन्दी अध्ययनशाला में नवस्थापित विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र में संग्रहकार्य, सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण जारी है। विश्वभाषा के रूप में प्रतिष्ठित हिन्दी के बहुकोणीय रेखांकन के लिए 2007 में स्थापित इस संग्र्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र में विगत एक हजार वर्षों के हिन्दी साहित्य के महत्त्वपूर्ण पक्षों को प्रस्तुत करने के साथ ही साहित्यिक पत्रिकाओं के विशेषांक,देश-विदेश के विभिन्न भागों से प्रकाशित हिन्दी समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ, प्रकाशन सूचियॉं, अनुसंधान सूचनाएं एवं अन्य आधार सामग्री को सॅंजोया गया है। विक्रम विश्वविद्यालय,उज्जैन के विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र के संस्थापक- समन्वयक प्रो.शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने बताया कि यहॉं स्थापित श्री गुरुनानक अध्ययन पीठ की दृष्टि से भारतीय भाषाओं में भक्ति साहित्य एवं गुरुनानक देव के साहित्य के साथ ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब महत्त्वपूर्ण पुस्तकें तथा पत्र- पत्रिकाएं संजोयी गई हैं। बसव समिति, बेंगलुरु, आंध्रप्रदेश हिन्दी अकादमी, हैदराबाद आदि संस्थाओं द्वारा अर्पित साहित्य, स्त्री एवं दलित विमर्श , राजभाषा एवं प्रयोजनमूलक हिंदी से संबद्ध प्रकाशनों को भी संग्रहीत किया गया है। प्रदर्शनकारी एवं रूपंकर कलाओं, संस्कृत साहित्य से संबद्ध सामग्री, बालसाहित्य, पर्यटन साहित्य, स्वाधीनता आंदोलन पर केंद्रित साहित्य भी यहां संजोया गया है। हिन्दी की साहित्यिक एवं लघु पत्रिकाओं के दुर्लभ अंकों के साथ ही वर्तमान में प्रकाशित हो रही तीन सौ से अधिक पत्र-पत्रिकाओं के अंक भी अवलोकनार्थ उपलब्ध हैं। अपने ढंग के इस प्रथम विश्व हिन्दी संग्रहालय में हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकारों पर एकाग्र वृत्तचित्रों के साथ ही लोकभाषा में निबद्ध गाथा, कथा तथा गीतों की आडियो-वीडियो, सीडी संजोयी गयी हैं, जिनका समय-समय पर प्रदर्द्गान किया जाता है।यहॉं प्रमुख साहित्यकारों के चित्र, हस्तलेख, पत्र आदि के डिजिटलीकरण की दिशा में कार्य जारी है। संग्रहालय में विभिन्न संस्थाओं साहित्यकारों एवं साहित्यरसिकों द्वारा भी महत्त्वपूर्ण सामग्री अर्पित की जा रही है। विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र के लोक- संस्कृति प्रभाग में मालवी लोक-संस्कृति के विविध पक्षों पर व्यापक कार्य जारी है। मालवी संस्कृति के समेकित रूपांकन एवं अभिलेखन की दिशा में विशेष प्रयास जारी हैं। यहॉं हिन्दी एवं मालवी के शीर्ष रचनाकारों के परिचयात्मक विवरण, कविता एवं चित्रों की दीर्घा संजोयी गयी है । चित्रावण, संजा, मांडणा, कठपुतली कला सहित मालवा क्षेत्र के विविध कलारूपों और भीली जनजातीय संस्कृति से सम्बद्ध महत्त्वपूर्ण सामग्री को भी इस संग्रहालय में संजोया गया है। हिन्दी और उसकी क्षेत्रीय बोलियों विशेषतः मालवी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विविध पक्षों से संबद्ध साहित्य, लेख एवं सूचनाओं का दस्तावेजीकरण इस केंद्र में किया जा रहा है। मालवी, बुन्देली, हाड़ौती, मेवाडी, मारवाडी, भोजपुरी, हरियाणवी,कन्नौजी,कनपुरिया, अवधी, ब्रजभाषा, निमाडी, भीली, भिलाली, बारेली, सहरिया, गोंडी जैसी बोलियों के अभिलेखन की दिशा में भी कार्य जारी है। हाल के दशकों में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में एक साथ कई दिशाओं में शोध कार्य हुआ है, जिनमें हिन्दी भाषा-साहित्य एवं संस्कृति के विविध आयामों के साथ ही हिन्दी कम्प्यूटिंग,वेब पत्रकारिता, दृश्य जनसंचार माध्यम, मशीनी अनुवाद, राजभाषा हिन्दी आदि के अधुनातन संदर्भ उल्लेखनीय हैं। यहॉं विश्वभाषा हिन्दी के साथ ही लोकभाषा मालवी के साहित्य एवं संस्कृति को लेकर महत्त्वपूर्ण काम हुआ है और आज भी जारी हैं। यहॉं स्थापित मालवी लोक साहित्य एवं संस्कृति केंद्र के अंतर्गत मालवी और उसकी उपबोलियों-सोंधवाड़ी, रजवाडी, दशोरी, उमठवाडी, निमाडी आदि पर महत्त्वपूर्ण कार्य हुआ है। यहॉं स्थापित भारतीय लोक एवं जनजातीय संस्कृति केंद्र के अंतर्गत बुन्देली, हाडौती, मेवाडी, भोजपुरी, हरियाणवी, अवधी, ब्रजभाषा, निमाडी, भीली, बारेली, सहरिया, गोंडी आदि पर भी उल्लेखनीय कार्य हुआ है। मालवी लोक-संस्कृति के विविध पक्षों, यथा-व्रत पर्व उत्सव पर केंद्रित लोक साहित्य, लोकदेवता, साहित्य, पर्यावरण, शृंगारपरक लोकगीत, हीड काव्य, माच परम्परा, संजा पर्व, चित्रावण, मांडणा, विरद बखाण, गाथा साहित्य, लोकोक्ति आदि पर भी महत्त्वपूर्ण अनुसंधान एवं अभिलेखन जारी है। हिन्दी अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन हिन्दी के साथ ही भारत की विविध बोलियों के लोक-साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्य के लिए कृत- संकल्पित है। इस दिशा में रचनात्मक सुझावों का सदैव स्वागत रहेगा। इस प्रथम विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र के समुचित विकास की दिशा में संभावनाओं के द्वार खुले हुए हैं। इस हेतु विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के विश्व हिन्दी संग्रहालय एवं अभिलेखन केंद्र के संस्थापक-समन्वयक तथा कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने देश-विदेश की अकादमिक संस्थाओं, साहित्यकारों तथा विद्वानों से सहयोग का अनुरोध किया है। प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा प्रोफ़ेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, संपर्क: सृजन, 407, साँईनाथ कॉलोनी, हिन्दी अध्ययनशाला एवं सेठीनगर, उज्जैन [म.प्र.] 456010 कुलानुशासक दूरभाष- 0734-2515573 मो. 09826047765 विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन [म.प्र.] ईमेल: shailendrasharma1966@gmail.com ब्लॉग लिंक : http://drshailendrasharma.blogspot.com/ http://drshailendrakumarsharma.blogspot.com/
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