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वर्ष: 2, अंक 35,  अप्रैल(द्वितीय) , 2018



उबकाई


राजीव कुमार


उबकाई भी क्या चीज है? कभी तो भोजन अधिक ठूंस लेने के बाद आती है तो कभी बिल्कुल न खाने पर भी मतलब अधिक भूखा रहने पर।

एक लड़का भूख के मारे तड़प रहा था, वो सबके पास हाथ फैलाता और कहता, ‘‘सुबह से भूखा हूं। पांच रुपये दे दो। भगवान आपका भला करेगा।’’

किसी ने पांच तो क्या, एक रुपया भी नहीं दिया और तो और ‘हट भिखारी’ बोलकर चले गए। वो लड़का हारकर एक पेड़ के नीचे पेट को सहलाते हुए बैठ गया। एक चमचमाती लाल रंग की कार के रुकने से उस लड़के की उम्मीद जगी, कार की खिड़की के पास जाकर लड़का बोला, ‘‘मां जी, भूख लगी है। कुछ पैसे दे दो।’’ कार में बैठी सुंदर मोटी-सी महिला ने कार का शीशा ऊपर चढ़ा लिया। लड़का वहीं थोड़ी देर कार को निहारता हुआ खड़ा रहा। कार में बैठी महिला को भूख का अहसास हुआ तो उसने लंच बाक्स खोला और खुशबू या बदबू कन्फर्म करने के लिए बाॅक्स को नाक के पास लाकर लंबी सांस ली।

अजीब-सा चेहरा बनाते हुए नाक-मुंह सिकोड़ते हुए, खिड़की खोली और लड़के को आवाज लगाई, ‘‘लो खाना खाएगा?’’ लड़के ने ज्योंही खाना हाथ में लिया तो उस महिला ने उल्टी की लंबी धारा सड़क पर बहा दी। लड़का दूर छिटककर चटकारे लेकर खाना खाने लगा। खाने की खुशबू भी महसूस करता रहा। उसी दिन शाम को एक लड़के को उस महिला की गाड़ी से धक्का लग गया। वो भिखारी लड़का लहूलुहान लड़के को तड़पता देखकर उबकाई करने लगा। वो महिला कार से उतरी, लड़के का खून देखकर उबकाई भी नहीं आई। उस महिला ने ड्राइवर को आदेश दिया, ‘‘गाड़ी जल्दी भगाओ, भीड़ इकट्ठा होने से पहले गाड़ी तेज रफ्तार से आगे निकल गई और वो लड़का भीड़ इकट्ठा करने लगा।


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