Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



तुम्हारा दिखना


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


 
तुम्हारा दिखना 
जैसे पूर्णिमा के चांद का दिखना
तुम्हारा दिखना 
जैसे इंद्रधनुष बारिश के बाद का दिखना
तुम्हारा दिखना 
जैसे सूरजमुखी का खिलना
तुम्हारा दिखना 
जैसे छुई-मुई का हिलना
तुम्हारा दिखना 
जैसे बच्चे का पेंसिल छिलना
तुम्हारा दिखना 
जैसे किसी अपरिचित-परिचित का मिलना।

 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com