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वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



असली सत्य


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


 
एक दिन मैंने ईश्वर से पूछा
हे प्रभु ! जीवन का असली सत्य क्या है
तब ईश्वर ने एक कफन का टुकड़ा मुझे थमा दिया
और बोला
इसे ओढ़ ले।
मैंने पुनरू प्रश्न किया
हे परमपिता ! तो क्या मैं सत्य के भय से
अपने जज्बे को मार दूँ 
तब ईश्वर ने कफन का टुकड़ा वापस ले लिया
और उस ओर चला गया
जिस ओर सूर्य चमक रहा था।
 

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