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वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



याद करना छोड़ दें


डॉ० अनिल चड्डा


 
क्यों न हम
इक-दूजे को 
याद करना छोड़ दें 
अपनी-अपनी राहें मोड़ लें 
दो समानांतर रेखायें
कहीं मिलती ही नहीं 
फिर
क्यों न 
ये उम्मीद तोड़ लें 
कि 
दुर्घटनावश ही 
शायद कोई रेखा 
टूट कर ही मुड़ जाये
और दूसरी रेखा से 
मिल जाये 
यूँ तो 
अक्सर होता नहीं 
जीवन में 
नई राहें
नये संगी 
जकड़ लेते हैं 
अपनी बाँहों में 
फिर 
क्यों 
आलिंगन किये रखें 
पुरानी भावनाओं से 
क्यों न 
जीवन से 
खुद को जोड़ लें  

 

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