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वर्ष: 2, अंक 35, अप्रैल(द्वितीय), 2018



हवा चली


डॉ. प्रमोद सोनवानी पुष्प


 
सर-सर,सर-सर हवा चली ।
फर-फर,फर-फर हवा चली ।।

शीतल हवा सुख देते जग को ।
सचमुच प्यारे लगते सब को ।।

हवा सभी का जीवन है ।
और सभी की राम कहानी ।।

इस पर निर्भर सकल जहान ।
बात यही बतलाती नानी ।। 

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