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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 59, अप्रैल(द्वितीय), 2019

नव अर्श के पांखी - "भाव ज़ेहन के :पंख शब्दों के" की समीक्षा

समीक्षक - सुभाष काबरा

अनुपमा श्रीवास्तव अनुश्री की 89 छोटी बड़ी रचनाओं का गुलदस्ता है नव अर्श के पांखी। इन रचनाओं को किसी एक तय सांचे में नहीं देखा जा सकता,देखने की जरूरत भी नहीं है क्योंकि खुद कवियत्री ने भी ये काम नहीं किया है।वो तो बस अपने भाव कागज पर उकेरती गई और पाठकों तक पहुंचने का प्रयास करती रही जिसमें अच्छी भाषा,सच्चे विचार,सार्थक शब्दों और प्रवाह ने अनु का भरपूर साथ दिया है।शीर्षक रचना "नव अर्श के पांखी" में ही अनु ने अपना मंतव्य काफी हद तक साफ कर दिया है..."नूतन विहान चाहिए, संवेदनाओं भरा नया जहान चाहिए,अपनी गति से गतिमान अंतरमन के एहसास चाहिए !"

आकाश का कोना कविता में वे एक ईमानदार बात सहजता से कह जाती हैं..."आकाश जितना आपके पास/उतना ही सबके पास/कभी लगता है यह भी/है सबके अपने अपने आकाश/. पावस उत्सव कविता की ये जरूरी पंक्तियां हमारे दौर की जरूरत है..."आइए कर लें/कुछ बहारें चोरी/बन जाएं बूंदों के हमजोली/." भारतीय कविता में उजागर कड़वा सच भी पठनीय है ..." क्षनिक प्रलोभनों व आकर्षण में फंस कर/हम अपनी सभ्यता और संस्कृति को दरकिनार करने लगते हैं/उसका उपहास करने लगते हैं /. भागमभाग कविता में इंसान के पत्थर होने की बात बड़ी सहजता से कह दी गई है..."किसको/कहाँ/लगी चोट/ठोकर/देखा ही नहीं पलटकर!".वक्त कविता में गूढ़ अर्थों वाली ये पंक्तियां बहुत हट कर हैं ..."वक्त के पन्नों पर लिखी/अनगिनत कहानी/कभी इसकी जुबानी/कभी उसकी जुबानी/वक्त की मेहरबानी/. कलम कविता में अनु ने कलमकार का वो हुनर रेखांकित किया है जिसे लोग भूल जाते हैं ..."धन्य है सृजनकार/परायी अनुभूतियों को भी/ह्रदय में सीप की तरह सहेज/कलम में पिरो देता है/"

अनुश्री के रचना संसार से गुजरते हुए एहसास होता है उनकी गहरी सोच और भावों को कम शब्दों में बांध कर कही गई कहन का।हर रचना कोई ठोस बात रेखांकित करती है और वो भी खुद पर अति विद्वान और ज्ञानी होने का ठप्पा लगाए बगैर।जैसा कि रिवाज रहा है,कई गुणीजन इस किताब को भी अलग अलग चश्मों से देखेंगे और आलोचना की दृष्टि से भी।लेकिन बतौर पाठक मुझे अनु की ये किताब सामान्य पाठकों से संवाद करती हुई लगती है।इसकी रचनाएं एक साथ पढ़ने के लिए नहीं हैं।आप फुर्सत के लम्हों में 1-2 रचनाएं पढ़ते चले जाएं तो अनु हर वो बात आप तक पहुंचाने में कामयाब होंगीं जो उनके अध्ययन, अनुभव और सोच का निचोड़ है।अनुश्री को इस किताब के लिए बधाई और यही दुआ कि-"अल्लाह करे जोरे कलम और जियादा !"


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