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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 59, अप्रैल(द्वितीय), 2019

भारत मेरा न्यारा है

गुर्जर विक्रमसिंह

ये भारत मेरा न्यारा है हमको ये जान से प्यारा है इस मिट्टी के कण - कण में बह रही भक्ति की धारा है कितनें ही वीर अंखड हुए और युध्द बडे प्रचंड हुए इस मिट्टी के गौरव हेतु कितने ही पुरु अवलंब हुए भक्ति रस है इस मिट्टी में और मानवता की रेख यहां है राम रहीम यहां एक से और सब धर्मों की देख यहां आजादी के परवानोंं ने इसे लहु से अपने सींचा है और गांधी गौतम नानक से महापुरुष यहां अनेक हुए है गर्व मुझे इस मिट्टी पर हर पल शीश झुकाऊंगा प्यारे मेरे हिनदुस्तां पर मैं अपना शीश चढाऊंगा


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