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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 58, अप्रैल(प्रथम), 2019

नमन है

कवि दीपक सिंह " दीपक"

तेरे सजदे में सिर झुका नमन है तुझे दिल से हजारों सलाम कर दूँ। लिपटा तू तिंरगे से भारत का शौर्य तेरे अद्भुत साहस का जयगान कर दूँ।। लाल कहता है माँ अपनी, जिंदगी तेरे नाम कर दूँ। पिता कहता है एक बेटा, क्या दूसरा कुर्बान कर दूँ।। भारत की नारी ये कहती बेवा हुई तो गम नहीं। सौ पुत्र मेरे हों तो, सवा अरब के नाम कर दूँ।। विचलित वेदना सी मैं ये दर्द कहा बयान कर दूँ। पूछती है ऐ सियासत क्या तुझपर इल्जाम कर दूँ।। बहनों ने जिस कलाई पर बाँधी राखी, वो शरीर टुकड़ों में है, मैं कैसे पहचान कर दूँ।। तेरे सजदे में सिर झुका नमन है तुझे दिल से हजारों सलाम कर दूँ। लिपटा तू तिंरगे से भारत का शौर्य तेरे अद्भुत साहस का जयगान कर दूँ।।


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