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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



दलित राष्‍ट्रपति का समाचार


रंजीत कुमार


गांव के सबसे सजग दलित से मैंने पूछा क्‍या समाचार है 
उसने कहा- सब रोपा दहा गया, बुरा हाल है
सबसे कर्मठ दलित से पूछा, क्‍या समाचार है
कहा- बेटा पंजाब में , बुढि़या बीमार है, बुरा हाल है 
दलित महिलाओं का झुंड आ रहा था, उससे भी पूछ लिया क्‍या समाचार है 
डीलर अनाज काला बाजारी कर रहा, कोई न देखनहार है 
दोपहर को ब्‍लॉक कार्यालय पहुंचा
दलित बाबू को देख पूछा, कहिये हाकिम क्‍या समाचार है 
कहा- रैयत रोपनी में व्‍यस्‍त है, जेबी में अकाल है 
मुझे समाचारों में दलित राष्‍ट्रपति की तलाश थी
गांव में नहीं मिला तो सांझ को मैं हाट गया
मैंने औजार बेच रहे लौहार से पूछा, क्‍या समाचार है
उसने कहा- लोग फटेहाल है, बिकता नहीं कोई औजार है 
मैंने मोची से पूछा- क्‍या समाचार है 
प्‍लास्टिक का जमाना है, किसी को न मेरा दरकार है 
मैंने झोला में सामान ले जा रहे हटवार से भी पूछ लिया क्‍या समाचार है 
परवल 50 रु, भिंडी 30 रु, झोला में बाबू बस गेन्‍हारी का ही साग है
गांव और हाट से निराश होकर मैं पहुंचा बस्‍ती में 
सूअरपालन में बड़ा नाम रखने वाले उगना से पूछा, कहो क्‍या समाचार है 
आधे सूअर बीमारी से मर गये, आधा बैंक से उधार है, बुरा-बुरा हाल है
थक कर मैं घर लौटा, टीवी में अब भी कहा जा रहा था
एक दलित का राष्‍ट्रपति बनना, इस युग का सबसे बड़ा समाचार है
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