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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



शहीदों को हर दिन ..........सादर नमन


कविता गुप्ता


आज़ादी के परवाने ! सरहद पर रण बाँकुरे शहीद 

क्या जन्म, मरण दिन पर ही होते दिल के करीब ?

नही..यह रुद्राक्ष की माला होते, हाथ में हों या हार

मानो ! इनके जाने से फीके हो जाते, सब त्यौहार। 

मौत का फंदा, सीने पर गोली होता अनुपम श्रृंगार 

कफन तिरंगे में लिपटा जब पहुंचे लुट जाता संसार ।   

	 
 
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