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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



आँसू


डॉ० अनिल चड्डा


 		 
मेरी आँखों में 
आंसू हैं 
तुम्हारी आँखों में भी 
आँसू होंगे
पर
इन दोनों में 
अंतर है 
और नहीं भी है 
मेरे आंसू
तुम्हे खोने के 
गम के हैं 
तुम्हारी याद 
आने के
दर्द के हैं 
जो वादा 
तुमने नहीं निभाया
उसकी 
तड़प के हैं 
तुम्हारे आँसू
खुशियाँ 
पाने के होंगे 
मुझे 
भूल जाने के होंगे
नई राह 
पाने के होंगे 
पर 
इन्हें अगर चखो 
तो 
ये नमकीन ही होंगे 
पता नहीं
समान प्रवृति 
होने के कारण
ये कभी तुम्हे 
मेरी याद भी 
दिलाते हैं या नहीं 
ये तुम्ही जानों 
मैं तो 
अपने गम के 
आँसू ही पी रहा हूँ !
आँसू ही पी रहा हूँ !!
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