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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



स्वागत है


आनंद कुमार


 		 
काली घनेरी रात की 
सोई जब सुबह जगी 
हुआ आगमन धूप का
चिर प्राण ऊर्जा के भूप का
स्वागत है, स्वागत है, स्वागत है।

स्वागत में चराचर भूप के 
मृदु मधुर धूप के 
हरे भरे पेड़-पौधे 
नत हैं, नत हैं, नत हैं।

आज पंछियों के कलरव ने
नभ को नये स्वर दिए 
फिर कौन ठहरे किसलिए 
सब मुक्त हैं, मुक्त हैं, मुक्त हैं।

खिल उठे हैं चेहरे सभी के 
मुरझाए से थे सब कभी के 
मन भी आज खुशी से
उन्मुक्त है, उन्मुक्त है, उन्मुक्त है। 
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