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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



हाइकु


सविता मिश्रा 'अक्षजा'


 
  (1)
मेघ हुआ बंजारा
रुक तनिक ठहर जा
बरस हम पर जरा सा
  (2)
कुछ मेरी जुबा सुनो
कुछ कहते खुद की|
कह सुन फिर उसे गुनों|
  (3)
मेघ घिरे जो काले
हो मन मतवाला
वर्षा के संग झूमें|
  (4)
पयोधर की ये घड़ी
झिर-झिर लगी झड़ी
बदरा से धरा लड़ी|
		 
 
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