Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


 
 (1)
घोर बारिश 
पसीना बह रहा 
लगे उमस।

 (2)
दीप जलता 
अँधेरा गहरा है 
डर खामोश। 

 (3)
नभ विशाल 
पंछी हुये आज़ाद 
मस्तमौला से। 

 (4)
सड़क सूनी 
पेड खड़े अनेक 
केवल पंछी। 

 (5)
शहर बड़ा 
लोग व्यस्त हैं अभी 
मिलना कैसा।
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें