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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



गीत-
यादों को बर्बाद किया


डॉ० अनिल चड्डा


 		 
मेरी यादों को आबाद किया,
या यादों को बर्बाद किया।
खुद पूछो तुम अपने दिल से,
तुमने कैसा है काम किया।। 

नहीं भूले कुछ भी दुनिया में,
जो आंखों को भा जाता है,
जाने क्यों आंखों के आगे,
बार-बार वही सब आता है,
इन यादों ने ही तो हमको,
कभी खुश, कभी नाशाद किया।
मेरी यादों को आबाद किया,
या यादों को बर्बाद किया।

कोई जमा खाता नहीं होता है,
जहाँ यादें रख के भूल जायें,
जब भी बात कोई  करता है,
जिक्र तुम्हारा आ  जाये,
बहुत करूँ कोशिश मैं लेकिन,
जुबाँ कभी तो फिसल जाये।
मेरी यादों को आबाद किया,
या यादों को बर्बाद किया।
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