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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



कुछ दिन तो गुजारो ....


सुशील यादव


 		 
सब का मालिक एक है,क्या गुजरात बिहार |
चारो-खाने चित हुई ,जनता की सरकार ||
 
पास अभी अनमोल ये,जनता का उपकार |
देख समझ के बोलिये ,नाविक-खेवनहार ||
 
वे कहते कुछ दिन सही,सह गुजरात गुजार|
अभी-अभी तो लौट हम,देखे  रंग हजार ||
 
पास हमारे  वोट हैं,करते तुम तकरार|
मंजिल तक पहुचा गई ,हमको कंडम कार ||
 
मन में अदभुत शांति का ,आवे कभी विचार |
दौरा कर गुजरात का ,विधायक ले उधार ||
 
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