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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



अंधेरा दूर भगाओ


डॉ० अनिल चड्डा


चंदा के घर इतने तारे,
इक भी नहीं है पास हमारे,
क्या करने हैं इतने तारे,
हमको चंदा ये तो बता रे।

बने हो तुम तारों के राजा,
सब कहते हैं आजा - आजा,
होड़ सभी तारों में लगी है,
हम को भी अपना सखा बना रे।

कहाँ से चाँदनी इतनी लाये,
शीतल सबके मन को भाये,
अंधेरे का डर दूर भगाये,
अंधेरों में हो सबके सखा रे।

खेलो सूरज संग आँख-मिचौली,
तुम छिप जाओ, जब वो आये,
तुम आओ तो वो छिप जाये,
हम को भी ऐसा खेल खिला रे।

चंदा बोला, सुनो रे बच्चो,
ग़र मेरे पास चमकते तारे,
तुम भी अपने देश के तारे,
इन तारों से तुम हो न्यारे।

चमक मेरी सूरज ने दी है,
मैंने फिर वो जग को दी है,
तुम चमको गे अपनी लगन से,
प्रभु ने तुमको वो शक्ति दी है।

तुम भी मुझ जैसे बन जाओ,
जग से अँधेरा दूर भगाओ,
दूजों से तुम ज्ञान को ले कर,
सारे जग में उसे फैलाओ।
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