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वर्ष: 2, अंक20, सितम्बर (प्रथम), 2017



डॉ० रिक लिंडल द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक 'The Purpose' का हिंदी अनुवाद
अध्याय 1
[.....पिछले अंक से]
बौनों का देश


लेखक: डॉ० रिक लिंडल
अनुवादक: डॉ० अनिल चड्डा


गर्मी के महीनों के सप्ताह जल्दी-जल्दी व्यतीत हो रहे थे. दिन के समय, रिक्की की चचेरी बहनें अक्सर अपना समय पास की पहाड़ी की बड़ी चट्टानों में खेल कर व्यतित करती थीं. रिक्की कभी-कभी उनके साथ खेलता था, क्योंकि यह उसकी जिम्मेदारी थी कि वह समय समय पर उनकी देखभाल करे. खेलने का समय जल्दी ही व्यतीत हो जाता था और काफी जोश भरा होता था, जब बच्चे चट्टानों में इधर-उधर दौड़ रहे थे तो दूसरों को ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किन्ही काल्पनिक दोस्तों के समूह के साथ खेल रहे थे. सिग्गी ने, रिक्की का अंकल जो दुनिया में दिखाई न देने वालों का ज्ञान रखता था, अंदाजा लगाया, यद्दपि वह बच्चों के साथ खेलने वालों को देख नहीं पा रहा था, कि उसकी बेटियाँ या तो अपनी मार्गदर्शक रूहों18 के साथ खेल रहीं थीं या फिर बौनों के बच्चों के साथ जो उन चट्टानों में रहते थे, और उसे इस बारे में कुछ अटपटा नहीं लगता था. उसकी बेटियाँ, हालांकि, चट्टानों में कभी भी अपने अदृश्य दोस्तों के साथ गायब नहीं हुईं थीं, तो सिग्गी ने सोचा कि उनके खेलने वाले साथी उनकी मार्गदर्शक रूहें होंगी. लेकिन यह भी संभव था कि बौने चट्टानों में से निकलते थे और केवल उसकी बेटियाँ ही खेल के दौरान उन्हें देख पाती होंगी. इनमें से एक अवसर पर, रिक्की अचानक उनींदा महसूस करने लगा और उसने चट्टानों के साथ टेक लगा कर बैठने का फैसला किया. वह तत्काल ही मूर्छावस्था में आ गया. तब उसने देखा कि चट्टान के साथ अकेले बैठे हुए बौनों का एक बच्चा रो रहा था. रिक्की उसके पास गया और उसने बौने के बच्चे से पूछा कि उसे क्या परेशानी थी, जिसके उत्तर में उसने कहा कि उसकी माँ बीमार थी और वह जल्दी ही मर सकती थी अगर वह उसकी सहायता नहीं कर पाया तो. रिक्की ने सहायता की पेशकश की, और बौने के बच्चा उसका हाथ पकड़ कर उसे एक बड़ी चट्टान की ओर ले गया. चट्टान के साथ एक बैंगनी फूलों वाला बहुत ही सुंदर पौधा उगा हुआ था. बौने का बच्चा झुका और उनमें से एक पौधे के तने से एक पत्ता तोड़ कर अपनी अंगुलियों में रगड़ा, जब तक कि रस ने उसकी अंगुलियों को नम नहीं कर दिया. उसने फिर रिक्की को झुकने के लिये कहा ताकि वह रस को उसकी पलकों पर रगड़ सके. जैसे ही ऐसा किया गया, रिक्की “बौनों के संसार” को उसी स्पष्टता से देख पाने में सक्षम हो गया था, जैसे वह अपनी दुनिया को देख सकता था. उसे एहसास हुआ कि केवल छोटे बौने की माँ और उसके बारह बच्चे ही इस चट्टानों के झुण्ड में रहते थे. चट्टानें उन सब के लिये बहुत सुंदर घर थीं, सामने वाले प्रवेश द्वार के बाहर सब्जियों और जड़ीबूटियों के बाग़ और पीछे चारागाह में चूजे, भेड़ें, पशु, और घोड़े. बौना रिक्की को एक चट्टान में ले गया और वहां एक शयनकक्ष था जहाँ उसकी माँ लेटी हुई थी; म्रत्यु के समीप. रिक्की ने पूछा कि वह किस तरीके से उसकी सहायता कर सकता था और उसने उत्तर दिया:

“बारह और बारह
तुम्हारे पिता, अब तुम
दो जिंदगियां जोखिम में
भुगतान बाकी है.”

रिक्की ने अनुमान लगाया कि यही वह बौनी-स्त्री है जिसने बहुत वर्षों पहले उसके पिता के प्राण बचाए थे, जब वह बारह वर्ष की आयु में झाड़ी घाटी की नदी के किनारे चट्टानों पर पुल से नीचे गिर गये थे. और अब रिक्की, जो अब उसी आयु का था जितनी के उसके पिता तब हुआ करते थे, एक “वस्तु के रूप में” कृत्य देय है. अपने स्वास्थय को फिर से ठीक करने के लिये बौनी स्त्री ने रिक्की को डेढ़ पाव छाछ लाने के लिये कहा. उसने बताया कि परिस्थितियां ऐसी थी कि दुर्भाग्यवश उसकी एक ही गाय गर्भवती और जब तक वह जन्म न दे ले वह दूध नहीं दे सकती थी. इसलिये वह मक्खन नहीं बना सकती थी या छाछ के औषधिक गुणों का लाभ नहीं उठा सकती थी, जो मक्खन का प्रतिफल है, जो तब बनती है जब चर्बी दूध से अलग होती है. रिक्की को पता था कि एलिन और डोरा ने उसी सुबह मक्खन बिलोया था और ये कि छाछ, जो साधारणतया शाम को बछड़ों को पीने के लिये दी जाती था, अभी भी उपलब्ध थी. रिक्की ने जल्दी की और डेढ़ पाव छाछ के साथ लौट कर आया, जिसमें बौनी स्त्री ने कुछ जड़ी-बूटीयाँ मिलाई. फिर उसने सारा डेढ़ पाव छाछ पी लिया. उसने रिक्की को उसकी दयालुता के लिये धन्यवाद दिया और वादा किया कि वह उसे ऐसी सलाह देने में सहायता करेगी जो उसे मनुष्यों में रहने के काम आएगी. बौना-बच्चा फिर उसे बाहर ले गया और उसकी पलकों से रस को पोंछ दिया, जिसके बाद बौनों के घर तत्काल ही अपने पुराने रूप में बड़े गोल पत्थरों की तरह हो गये, और बौनों को कहीं भी देखा नहीं जा सकता था.

इससे पहले कि बौनी-माँ रिक्की से दोबारा सम्पर्क करती, कुछ हफ्ते बीत गये थे. वह उसके सपने में आई और कहा कि उसने अपने एक पुराने बुद्धिमान मित्र से बात की थी, जो हीथर हिल्ल19 में रहता था जो झाड़ी घाटी नदी से तीन मील की दूरी पर थी. उसने कहा कि वह एक रूह थी और उसका नाम पुरानी आत्मा था. और उससे भिन्न, जो बौनों के अदृश्य संसार में रहती थी, पुरानी आत्मा मानवीय रूह है जो रूहों के अदृश्य संसार में रहती है. बौनी स्त्री ने उसको सलाह दी कि वह इस रूह से मिले. एक बार फिर, उसने रिक्की को उसकी सहायता के लिये धन्यावाद दिया और बताया कि छाछ जो उसने ला कर दी थी, उन जड़ी-बूटियों के साथ जो उसने मिलाई थीं, ने उसकी सेहत को पूरी तरह से ठीक कर दिया था. जाते हुए, उसने निम्नलिखित छन्दों को पढ़ा और कहा कि रिक्की पुरानी आत्मा से मिलने से पहले ध्यान से उन पर मनन करे, यदि वह उसकी सलाह मानने का निर्णय लेता है:

तुम्हारे संसार में,
जहाँ मैं तुम्हे देखती हूँ, लेकिन तुम मुझे नहीं देखते,
तुम जन्म ले कर आते हो और संधर्ष करते हो
एक भौतिक ब्रह्माण्ड के साथ:
जो तुम्हारे सूर्य द्वारा दी गई रौशनी
गुरुत्वाकर्षण, तुम्हारी धरती द्वारा


ऋतुएँ, तुम्हारे मौसम द्वारा
अंतर, तुम्हारी इन्द्रियों द्वारा
इन सभी को तुम्हे स्वीकारना है और इनमें रहना है


और तुम हो:
स्वभाव से विशिष्ट
कार्यवाही द्वारा संचालित
जो दूसरों की तरह नहीं है
अनुभवों को बनाते हुए
समय में अटके हुए


भाग्य की बेड़ियों में बंधे हुए
एक उम्र बढ़ने वाला जीवनकाल

और इस बारे में तुम सीखोगे:
प्रेम और भय
क्रोध और अवसाद
अपराध बोध और शक्ति
घृणा और बुराई
जब तक कि तुम अनिवार्यत: मर न जाओ
और फिर जागो
रूहों के देश में

रिक्की जब अगली सुबह जागा तो उसको यह सपना बड़ी अच्छी तरह से याद था. कुछ सप्ताह बीत गये. फार्म सामान्य चल रहा था. सिग्गी हर सुबह छ: बजे जागता था, और, क्योंकि गायें गर्मियों में बाहर सोती थीं, रिक्की का काम उन्हें वहां से वापिस ले कर आना था जहां वह रात में घूमने चली जाती थीं. मई, जून और जुलाई में सूर्य क्षितिज के नीचे कुछ ही घंटों के लिये जाता था, और संध्यावेला रातों में होती थी. ज्यादातर जंतु इन गर्मी के महीनों में दो या तीन घंटो के लिये ही सोते प्रतीत होते थे, और प्रात:काल में, चिड़ियों की कई किस्मे चहचहाती और गाती थीं, और हर तरफ, जहाँ तक भी आँख देख सकती थी, जीवन गतिविधि से भरा हुआ था. गाय अक्सर एक या दो मील दूर तक चली जाती थीं, कभी-कभी धसान और दलदल के पार. उन्हें पैदल वापिस लाने में सामान्यतया एक घंटा लगता था, लेकिन तब यह आसान होता था जब घोडा उपलब्ध होता था और रिक्की घोड़े की पीठ पर बैठ कर उन्हें वापिस ला सकता था.

यह सुबहें बड़ी खूबसूरत थीं, लेकिन अकेले चलना, दूर फार्म की ओर, दलदल के पार जहां परमाफ्रॉस्ट जिसने नर्म कोयले को घास के नीचे के मैदान से पिघला दिया था, जिससे दलदल उसके पैरों के नीचे से फिसल रहा था, रिक्की को दोनों ही भयभीत और आनन्दित कर रहा था. इन दलदलों में गहरे, तंग नाले थे जो मकड़ी के जाल की तरह धारा बना रहे थे जिससे पानी छोटे तालाब में जा रहा था और वहां से, एक गहरे तंग नाले से होते हुए झाड़ी घाटी नदी में, जो कुछ मीलों की दूरी पर थी, जा रहा था.

जब वह इन दलदलों की उलझन से गुजरता था, रिक्की को हमेशा डर लगता था. किसी अनजाने कारण से, उसे बहुत पहले से ही पानी से भय लगता था. उसे याद था कि जब पांच या छ: साल का था तो वह घर पर शौचालय इस्तेमाल करके मुश्किल में पड़ जाता था और फ्लश चलाने से बहुत डरा हुआ रहता था, पानी को नाली में जोर से खिंचते हुए देखने के डर से. जब वह दलदल में से चलता था, वह अपनी सांस रोके रखता था. उसे अपना सिर घूमता हुआ प्रतीत होता था. उसका दिल जोर-जोर से धडकने लगता था जब घास उसके शरीर के भार से हट जाती थी, गीली, कीचड़युक्त घास में तरंगे उठाते हुए, जैसे किसी पत्थर को पानी में फेंकने से होता है. तब क्या होगा अगर वह नीचे खाई में गिर गया तो? वह अकेला था. कोई उसे कभी खोज नहीं पायेगा. एक तर्कसंगत सोच से, हालांकि, उसे इस तथ्य से ढाढस मिलता था कि घास का मैदान गायों के भार से धंसा नहीं जब वह, अनुमानत:, पिछली रात इस पर से चल कर गईं होंगी.

भाग्य से, दलदल वाली भूमि के टुकड़े इस रास्ते पर अधिक नहीं थे, और अंतत: जब रिक्की गायों के इतने नजदीक आ जाता था कि वह उसे देख पायें, वह जितना जोर से हो सके उतनी जोर से “रंभाता” था और गायें उसे पहचान जाती थीं और समझ जाती थीं कि अब घर जाने का समय हो गया था. सुबह उनके थन भरे हुए होते थे, और वह स्वादिष्ट अनाज के डोल का इंतजार करती थीं जब उनका दूध निकाला जा रहा होता था तो. जब वह रिक्की को बुलाते हुए सुनती थीं, वह चहलकदमी करते हुए एक लाइन में आ जाती थीं, सबसे अधिक हावी गाय झुण्ड का नेतृत्व करते हुए. रिक्की उन्हें हांकता था, और जब वह गौशाला में पहुँचती थीं, हरेक अपने स्थान पर चली जाती थी. वह अपने स्थान को भलीभांति जानती थीं, उनमें सारी सर्दियों में सोने के कारण. जब तक रिक्की पहुँचता था, पीटर ने गोबर की नाली साफ़ कर दी होती थी, उनके स्टाल तैयार कर दिए होते थे, एक स्वादिष्ट अनाज का डोल हरेक गाय की नांद में खाने के लिये डाल देता जब उनका दूध निकाला जा रहा होता था. गौशाला में बिजली नहीं थी; एक छोटी सी खिड़की से पर्याप्त रौशनी आ जाती थी, और गायों का दूध हाथ से निकाला जाता था. बाद में, रिक्की उन्हें बाहर चारागाह में ले जाता था, जहां वह संध्या तक चरती रहती थीं, और उस समय उन्हें शाम का दूध निकालने के लिये वापिस ले जाया जाता था, रात के लिये फिर से बाहर ले जाते हुए.

कभी-कभी गाय घूमती हुई हीथर हिल्ल की ओर चली जाती थीं, जहाँ बौनी स्त्री ने कहा था कि पुरानी आत्मा रहती थी. और, यदा-कदा, नदी की छिछली जगह से वह नदी के पार और नदी के दूसरी तरफ के किनारे पर भी चली जाती थीं, जहां घास ज्यादा हरी-भरी थी. नदी उन क्षेत्रों में गहरी थी जहाँ यह तंग थी, और वेग से गाय अपना संतुलन खो देती थीं यदि वह उस स्थान से पार करने को चुनती थीं, उन्हें कुछ दूरी तैर कर पार करने के लिये मजबूर करती हुईं.

एक सुबह, जब रिक्की हीथर हिल्ल पहुंचा, उसने पाया कि गायों ने नदी को पार कर लिया था. उसने उन्हें बुलाया और जितनी जोर से हो सका रंभाया, लेकिन वह उसे हवा के कारण, जिसने उसकी आवाज को उड़ा दिया था, सुन नहीं पाई. नदी के साथ साथ किनारों पर और हीथर हिल्ल के सम्मुख, ग्रेनाइट की एक बहुत बड़ी चट्टान का तल था. रिक्की ने निश्चय किया कि वह चट्टान के तल पर चढ़ेगा और इस नजरिये से नदी के पार बुलाएगा. जब वह चट्टान पर खड़ा था, हवा की गति अचानक बढ़ गई, इसने दिशा बदल ली, और उसकी आवाज को नदी के पार गायों तक पहुंचा दिया जो दूसरे किनारे पर चर रही थीं. जैसे उन्होंने उसे बुलाते हुए सुना और हवा में अपना हाथ हिलाते हुए देखा, वह नदी को पार करके वापिस आने लगीं, कुछ चल रहीं थी, लेकिन बाकियों को कुछ रास्ता तैर कर आना पड़ रहा था.

उस दिन बाद में, सायंकाल में, जब रिक्की सो गया था, उसे एक जीवंत स्वप्न ने जगा दिया. सपने में, वह नदी के पास हीथर हिल्ल पर चट्टान के तल पर बैठा था, गायों के दूसरी ओर से वापिस आने के इंतजार में. उसी समय पहाड़ी से एक रूह उभरी और कहा, “मैंने हवा को तुम्हारी आवाज को नदी के पार पहुँचाने के लिये मजबूर किया और गायों को वापिस लाने में तुम्हारी सहायता की, और मैं तुम्हारी सहायता फिर से करूंगी यदि तुम चाहो तो.” रिक्की ने अनुमान लगाया कि यह पुरानी आत्मा होगी जिससे बौनी स्त्री ने मिलने की सलाह दी थी. पुरानी आत्मा ने जारी रखा, ”मुझसे मिलने के लिये, इस चट्टान पर तुम्हे गोल चक्कर में चलना होगा; तीन बार घडी की सुइयों की दिशा में, और तीन बार विपरीत दिशा में. उसके बाद एक प्रिय विचार के साथ हीथर हिल्ल की ओर मुंह करके खड़े हो जाने से मेरे संसार का दरवाजा तुम्हारे लिये खुल जाएगा.” फिर पुरानी आत्मा सपने में गायब हो गई.

रिक्की ने किसी को भी बौनी स्त्री के हुए अनुभव के बारे में नहीं बाताया था, और उसने निश्चय किया कि इस सपने को भी अपने तक ही रखना बहुत अच्छा होगा, कम से कम इस समय के लिये.

गर्मी के दिन शीघ्रता से व्यतीत हो गये, और अगस्त तक, सूखी घास बनाने का मौसम पूरे जोर पर था. सिग्गी एक पुराने ट्रेक्टर का इस्तेमाल करके वहां घास काटता था जहाँ भूमि समतल थी और एक दरांती से जहां भूमि समतल नहीं थी या जहाँ खड़ी ढलान थी. और, जबकि सूर्य चमक रहा था, फार्म पर प्रत्येक व्यक्ति, घास इकट्ठा करने के औजार को हाथ में ले कर, एक ही लाइन में इकट्ठे हो जाते थे और फार्म के पार तीव्रता से जाते थे, सूखी घास को पलटते हुए ताकि यह अच्छी तरह से सूख जाये. वह इस तरह से फार्म के एक सिरे से दूसरे सिरे की ओर जाते थे, जाना और वापिस आना, जब तक कि सारे फार्म की सूखी घास न पलट दी जाये. एक बार सूखने के बाद, सूखी घास को औजार से पंक्तियों में लगा दिया जाता था, और रिक्की, एक घोड़े से खींचने वाले गट्ठा बनाने वाले से इसे गट्ठों में इकट्ठा कर देता था इससे पहले कि यह गौशाला में सर्दियों के लिये ले जाया जाये. यह मनोरंजक समय होता था, यद्दपि इसमें जल्दबाजी होती थी क्योंकि सूर्य चमक रहा होता था, ताकि वह मौसम के बदलाव में न फंस जाएँ.

फार्म पर बहुत घोड़े थे – कुछ काम करने वाले, जिन्हें वैगन और सूखी घास के गट्ठे खींचने के लिये इस्तेमाल किया जाता था, दूसरे सवारी के लिये और भेड़ों और घोड़ो को शरद ऋतु में बर्फ गिरने से पहले इकट्ठा करने के लिये इस्तेमाल किया जाता था. रिक्की के पास सुनहरी रंग का बहुत सुंदर घोडा था, जिसका नाम ट्रस्ट20 था. रिक्की हमेशा उसकी नंगी पीठ पर सवारी करता था, क्योंकि यह उसकी शक्ति को पूरे तरीके से महसूस कर सकता था, घोड़े के पसीने की मीठी सुगंध सहित, खास कर सरपट दौड़ने के बाद. रिक्की एक विश्वसनीय घोडा था, और रिक्की को उससे बहुत प्रेम था. रविवार को, रिक्की अक्सर अपने घोड़े पर सवारी करके उसे पास के फ़ार्म कोट21 ले गया, जहाँ वह अपने एक मित्र के साथ गया था. इस फार्म का रास्ता हीथर हिल्ल के बड़ी नजदीक से गुजरता था, जहाँ पुरानी आत्मा रहती थी.

[क्रमशः........(अगले अंक में पढ़ें "एक और आयाम")]
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