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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



हाँ , मैं चोर हूँ


सुशांत सुप्रिय


व्यस्तता की दीवार में
सेंध लगा कर
मैं कुछ बहुमूल्य पल
चुरा लेना चाहता हूँ --
क्या पुलिस मुझे पकड़ेगी ?

बीत चुके वर्षों की
बंद अल्मारी में
चोर-चाबी लगा कर
मैं कुछ बहुमूल्य यादें
चुरा लेना चाहता हूँ --
क्या पुलिस मुझे पकड़ेगी ?

'हलो-हाय' संस्कृति वाले महानगर
के अजायबघर का ताला तोड़ कर
मैं कुछ सहज अभिवादन
चुरा लेना चाहता हूँ --
क्या पुलिस मुझे पकड़ेगी ?
 
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