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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



आहट


-दीप्ति शर्मा


  
घने कोहरे में बादलों की आहट
तैरती यादों को बरसा रही है 
देखो महसूस करो 
किसी अपने के होने को 
तो आहटें संवाद करेंगी
फिर ये मौन टूटेगा ही
जब धरती भीग जायेगी
तब ये बारिश नहीं कहलायेगी 
तब मुझे ये तुम्हारी आहटों की संरचना सी प्रतीत होगी
और मेरा मौन आहटों में 
मुखरित हो जायेगा।
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