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साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017






   आदरणीय संपादक महोदय

आज साहित्य का सागर निःसंदेह विस्तृत हुआ है परन्तु यह भी एक कटु सत्य है कि नवीन लेखकों को एक सही व आदर्श मंच नहीं मिल पा रहा है। आप कवि सम्मेलनों की ही बात करें तो जो कवि पहले से ही प्रतिस्थापित एवं प्रतिष्ठित हैं उन्हें ही मंचों पर एकाधिकार दिया जा रहा है। उन्हीं की रचनाओं को वरीयता दी जाती हैं जबकि परिवर्तन संसार का नियम है। मुझे हर्ष हो रहा है कि आप जैसे विद्वानजन नवीन कवियों एवं लेखकों को एक आदर्श मंच उपलब्ध कराने हेतु प्रयासरत हैं। जिसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण "साहित्य सुधा'' पत्रिका है। मैं पत्रिका के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ।

सादर

"एकलव्य"

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