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वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



हारते हैं दिल से सभी!


डॉ० अनिल चड्डा


 
जिंदगी से हारते नहीं,
हारते हैं दिल से सभी!

रवानगी बनी रहे,
बिन थके हम चलें,
मंजिलें मिलती हैं तभी!

कोई भी लक्ष्य बने,
नजर वहीं पर रहे,
राह नहीं रुकती है कभी!

साहस को नहीं छोड़ना,
राह नहीं कभी मोड़ना,
संग तेरे चलें सभी।!
 
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