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वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



ऐसा तो कभी नहीं हो सकता


डॉ० अनिल चड्डा


 
कोई भूल जाये अतीत को,
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता,
न याद करे कोई मीत को,
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता।

ये माना कि मजबूरी हो,
अपनी ओढ़ी हुई दूरी हो,
पर भूले अपनी प्रीत को,
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता।

हर चाहत की इक गाथा है,
कोई खोता है, कोई पाता है,
पर पा कर खो दे उनको,
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता।

दिल धड़के, जीवन जीता है,
धीरे-धीरे गम पीता है,
कोई गम खा करके भी खुश रहे,
ऐसा तो कभी नहीं हो सकता।
		 
 
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