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साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



हाइकू


अशोक बाबू माहौर


 (1) 
धुंध कोहरा 
ओस पत्तियों पर 
हवा डराती
 (2)
नभ विशाल 
फैला चारों तरफ 
भानु अकेला
 (3)
जगमगाते 
तारे नभ में सारे 
चाँद शर्माता
 (4)
खामोश प्रातः
ठण्ड सरसराती 
मुख थर्राते
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