Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



दोहे


राजेश पुरोहित


 
1.सप्ताह का दिन रविवार,काम होते है हज़ार।
घर परिवार में गुज़ार, खुशियां मिले अपार।।

2.मौज सभी मिलकर करो,आया फिर रविवार।
अपनो से बातें करो,खुशी गम की हज़ार।।

3.नारे झूठे लगा रहे,राजनीति में आज।
वादे जनता से किये,नेता जी ने आज।।

4.धर्म जात में बंट गया,देखो अब इंसान।
आरक्षण की आग में, जल रहा हिंदुस्थान।।

5.राजनीति की नाव में ,बैठे सारे चोर।
लगी डूबने नाव जब,चोर मचाये शोर।।

6.ज्ञान किवानी खोल दे, मिटे मन का अज्ञान।
हो गुरुवर ऐसी कृपा,पाये हम सत ज्ञान।।

7.पढ़ते लाखो लोग है,ये गीता का ज्ञान।
गीता ज्ञान महान है,कोई बिरला जान।।
 
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें