Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



तब समझो इंसान बने हम


राहुल जमलोकी



रोता जब कोई दिखा हमें 
अपने भी आंसू आएँ तब 
बच्चे को गोदी लेने को 
आगे बाहें आएँ  जब 
मदद किसी की करने की 
नित ही चाहें आएँ  जब 
पीड़ा औरों की देखें तो 
खुद को भी पीड़ित पाएँ  जब 
रोज हमेशा देने को तैयार रहे 
वो दान बने हम 
तब समझो इंसान बने हम 

औरों का  भार उठाने को 
जब हाथ हमारा आगे हो 
असहाय जनों का देने में 
जब साथ हमारा आगे हो 
अंधकार हो किसी के घर में 
अँधियारा वो हमें खले 
प्रेम बाँटने की चाहत हो 
वही हृदय में रोज पले 
भूख से व्याकुल दिखे कोई 
खुद से भी खाया न जाए
औरों का मुख मुरझाया हो 
खुद को भी सजाया न जाए 
उजड़ा हो घर-बार किसी का 
खुद का भी बसाया न जाए 
उदास किसी का चेहरा देखे 
खुद को भी हँसाया ना जाए 
चोट किसी की देखे तो 
दर्द हमारे तन में हो 
हँसी किसी के ओंठों पर हो 
ख़ुशी हमारे मन में हो 
जब निर्धन, पीड़ित, दीन-दुखी की 
एक नयी पहचान बने हम 
तब समझो इंसान बने हम 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें