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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



ये इश्क ही तो है


रश्मि सिंह


 

अच्छा लगता है 
जब तुम
मेरी आँखों में 
खुद को तलाशते हो
और बिना मेरे कुछ कहे 
उन अनकहे शब्दो 
को पढ़ लेते हो 
जो सिर्फ मेरी 
आँखें तुम से कहती है 
और मुझे पूर्ण होने का 
एहसास कराती है
अच्छा लगता है 
जब मेरी चूड़ियां खनक 
कर तेरा नाम गुनगुनाती है 
और मेरे पाजेब छन छन 
कर तुम्हे पुकारते है 
मेरे माथे की बिंदिया 
जिसे तुम अपना चाँद 
बुलाते हो मेरे दो नैनों के 
बीच बस तुम्हे ही तो दर्शाती है 
जब जब तुम कैनवस पर 
रगों को डालते हो 
मेरी ही तस्वीर उभर कर आती है 
और एहसास करा जाती है 
एक ज़िन्दगी है 
मैं हूँ तुम हो
और बस एक सच है
हमारे इश्क का सच


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