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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



एहसास ए इश्क


रश्मि सिंह


 

जब तुझे चाहत का एहसास होगा........
न मैं रहूंगी न वो ख़्वाब
अधूरे से 
जो साथ मिलकर देखे थे.............
वो जमीन भी बंजर हो गई
जहाँ कभी कुछ फूल खिला करते थे.........
एक पुल बनाया था तुमने
सपनो के पास जाने का............
वो पुल भी आज जर्जर हो गया
देखो न अब ये भी मर रहा है...........
जैसे कभी ख्वाब मरे थे तुम्हारे
मैं भी मर रही हूँ बस इस आस में..........
आज तुझे चाहत का एहसास हुआ
पर आज तुम फीर से अकेले रह गए...........
इस बार भी मैंने साथ नहीं छोड़ा
मेरे जिस्म ने मेरी रूह को अलविदा कहा.....….
की आ जाना तुम मेरी जिस्म पे कफ़न चढ़ाने
की मेरी रूह को भी तेरी मोहब्बत का एहसास हो।

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