Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



प्रहरी


कुलदीप पाण्डेय आजाद


 
लालच  के आगे तुम अपने,
अधिकारों को मत भूलो |
लोकतन्त्र के प्रहरी हो तुम,
हाथ उठा नभ को छू लो |
बाहर से बाग दिख रहा पर,
अंदर से क्या सूरत है ?
जो माली कंटक छाँट सके,
उसकी आज जरूरत है |
वर्षों से दबी जो चिंगारी,
उसको आज जलाओ तो,
आँचल से बाहर निकलो,
भ्रष्टाचर मिटाओ तो |
मातृभूमि प्रणों से प्यारी,
प्यारा प्राणों से उपवन |
बाहर से तो उजियारा है,
पर है अंदर छाया तम |
भीतर छुपा जो अँधियारा,
उसको आज मिटाना है |
जलना पड़े स्वयं हमको तो,
दीप हमे बन जाना है | 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com