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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



ऐसा देश हमारा है


कुलदीप पाण्डेय आजाद


 
बने डाक्टर बेटा खुद का,
हो सुखदेव पडोशी का |
खुद करना नहीं चाहते बस,
इन्हें लगाना नारा है |
ऐसा देश हमारा है ||
कुछ पचा दवा से सोते हैं,
पेट पकड़ कुछ रोते हैं |
कुछ तरस रहे हैं पानी को,
कुछ हाथों मे प्याला है |
 ऐसा देश हमारा है ||
सीमा पर हथियार चलते,
मगर नहीं धन इतना पाते |
जितना धनी आज हाथों से,
बैट चलाने वाला है |
ऐसा देश हमारा है || 

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