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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



खोए मोती


कामिनी कामायनी


 
कल का दिन /
आसमान के बादलों के साथ /
इधर उधर छितराते हुए /
भांति भांति के रूप बनाते /
कभी सुस्त /कभी तेज कदमों से /
अन्तरिक्ष से  दिललग्गी करते /
सूरज के ढलते ही /
काले काले /चमकीले चादरों से लिपट /
जाने कहाँ खो गए थे /
कल का दिन /कभी वापस आएगा   क्या /
उसके पास /पूछने /उससे उसका हाल/
कैसे खामोशी से /
बीत गया कल का दिन /
सोच कर आँसू आ गए आँखों मे/
कितना प्यारा था कल का दिन /
काश /मुट्ठियों मेँ बंद रखते /कल का दिन /
यूं नहीं तड़पता फिर /कलेजे को /कल का दिन ।

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