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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



* मेरे हाइकु *


सत्या शर्मा ' कीर्ति


 

  1.

लेते हैं जन्म
हृदय की कोख में
हमारे भाव

  2.

नव जीवन
विकसित होकर
पुकारता माँ

  3.

जीवन मृत्यु
अंतहीन सफर
पड़ाव कहाँ

  4.

गुजरे पल
उग आते झुर्रियाँ
उम्र डाली पे

  5.

पूनम चाँद
खेतों की हरियाली
ढूंढता फिर

  6.

जीवन भ्रूण
बिखेरता सूरज
कोख धरा का

  7.

उगे अंकुर
कोख आँगन में
पुकारे माँ

  8.

दाल व रोटी
गुजरे कई दिन
थाली उदास

  9.

बिखरे भाव
शब्दों की ढेर पर
रोये कविता

  10.

बजे न धुन
सरगम उदास
गुम चिरैया

  11.

भींगा आँचल 
सूना घर आँगन
बेटा विदेशी

  12.

मिसरी बोल
खोले बन्द कपाट
हंसे चेहरे

  13.

ईश दर्शन
एक ही अभिलाषा
जीव आत्मा की

  14.

चिलचिलाती
जीवन की ये धूप
वर्षा तू कहाँ

  15.

टपके लहू
आसमां की गोद से
हैरान आँखे

  16.

सूखी आँखे
धरती है उदास
इंद्र नाराज

  17.

साँझ की बेला
कंधे पे थकान ले
लौटे पथिक

  18.

चाँद का टीका
नन्हे के माथे पर
लगाती है माँ

  19.

रिश्तों की ढेर
चारों ओर हमारे
तो भी दूरियाँ

  20.

हँसती बेटी
बिखेरती सुंगध
घर आँगन

  21.

सीमा पे गाएं
अमन शान्ति गीत
जनता खुश

  22.

जीवन सार
संस्कारों की खूंटी पे
बंधी डोर से

  23.

टँगी पड़ी है
जाने कितनी यादें
मन खूंटी पे

  24.

सर्द मौसम
आसमां खूंटी पे
अटकी धूप

  25.

दूरियाँ मिटा
भाईचारा बढ़ाएं
देश हित में

  26.

माँ का आँचल
मनोकामना भरा
स्वर्ग जैसा

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