Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



मुकद्दर जहाँ में उसी का हुआ है!


धर्मेन्द्र अरोड़ा"मुसाफ़िर"


 
मुकद्दर जहाँ में उसी का हुआ है!
खुद पे ही जिसने भरोसा किया है!!

जो भी चला है कांटों के पथ पर!
फ़ूलॊ का ही फ़िर बिछौना मिला है!!

हर इक खुशी को जिसने है पाया!
गमों का उसी ने ही बोझा सहा है!!

जीवन के विष को जिसने चखा हो!
आखिर उसी ने ही अमृत पिया है!!

हर दर्द जिनकी दवा बन गया हो!
ज़ख्मों को अपने उसी ने सिया है!!

अपना इरादा जो मज़बूत रखते!
बुलंदी को फिर तो उसी ने छुआ है!!

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com