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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



दर्द से सामना हो गया

डॉ० अनिल चड्डा

     
दर्द से सामना हो गया,
दिल मेरा जब तेरा हो गया।

आस मेरी न टूटे यहाँ,
दिल मेरे को ये क्या हो गया।

खूब आँसू मेरे हैं बहे,
हर लम्हा अश्कों सा हो गया।

आइना भी वही कह रहा, 
जो जहाँ में सच्चा हो गया।

हाले दिल अनिल बोना न था,
जाने कैसे बयाँ हो गया।

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