Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



सार छंद


सुशील शर्मा


  
[28 मात्राएँ 
16 ,12 पर यति 
चरणान्त में गुरु गुरु 
क्रमागत चरण तुकांत] 

सजल नेत्र से राधा देखे ,
कहाँ छुपे कन्हैया।  
चंचल चितवन मुरलीवाला ,
नाचे ताता थैया। 

कृष्ण छवि आँखों में बस गई ,
याद रहे दिन रैना। 
हर पल उसकी याद सताये ,
ह्रदय न पाये चैना।

राधा ने जब कान्हा देखा ,
सुध बुध खो दी सारी। 
सुन वंशी की लय कृष्णा की ,
तन मन सब कुछ हारी। 

मनस पटल पर कान्हा बसते ,
करें किलोल बिहारी। 
ह्रदय सुवासित कृष्ण प्रेम से ,
गोवर्धन गिरधारी। 

माखन चोर नन्द का लाला ,
बोले मीठी बानी। 
कान्हा पर सब मोहित होवें। 
गोपी सब बौरानी। 

कान्हा कान्हा सब कहते हैं ,
जपें ध्यान में ज्ञानी। 
कृष्ण जपें राधा की माला ,
राधा कृष्ण समानी।

गिरधारी को नाच नचाती ,
बरसाने की छोरी। 
प्रेम पास में नाग नथैया ,
जुड़ी प्रीत की डोरी। 

प्रेम अर्थ राधा से पूछो ,
जिसने सब कुछ वारा। 
खो कर जिस ने निज कान्हा को ,
प्रेम अर्थ संवारा। 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com