Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 27, दिसम्बर(द्वितीय), 2017



डॉ० रिक लिंडल द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक 'The Purpose'
के हिंदी अनुवाद का अगला भाग
[.....पिछले अंक से] अध्याय 4
" शरीर के महत्वपूर्ण पहलू "


लेखक: डॉ० रिक लिंडल
अनुवादक: डॉ० अनिल चड्डा


पुरानी आत्मा ने जारी रखा, “भौतिक शरीर की कुछ विशेषताएं होती है जो हमेशा एक जैसी होती है. यह विशेषताएं शरीर को भौतिक संसार को समझने की साम्थर्य देती हैं, और पहले मैं उनका वर्णन तुमसे करूंगा. उसके बाद मैं आधारभूत जरूरतों को, जो तुम्हारे शरीर को ढंग से कार्य करने के लिये मिलनी चाहिये, का वर्णन करूंगा. और अंत में, मैं संक्षेप में कुछ चुनौतियों के बारे में बात करूंगा जिनसे शरीर का सामना होता है, जब तुम इसे भौतिक संसार में इधर-उधर घूमने के लिये प्रयोग करते हो.

“आपके शरीर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसकी ‘शारीरिक विषमता’ का पता लगाने की योग्यता है.

“भौतिक शरीर सहजता से विषमता की ओर खिंच जाते हैं, क्योंकि यह उस नींव का स्रोत है जिसके माध्यम से यह भौतिक संसार का अनुभव ले पाता है. अगर तुममें विषमता का पता लगाने की योग्यता नहीं होती, तुम किसी भी चीज को समझ नहीं पाओगे और, फलस्वरूप, तुम्हे एक भी अनुभव नहीं होगा. विषमता की अनुभूति तुम्हारे संवेदी तंत्र से मिलती है, और यह उन्ही माध्यम से होता है कि तुम अपने भौतिक अस्तित्व का अनुभव कर पाते हो. उदाहरण के लिये: आपकी आँखों के पास रौशनी की आवृत्तियों में अन्तर करने की क्षमता है और आपको वेवलेंथ की एक विशिष्ट सीमा में रंगों का स्पेक्ट्रम देखने देती हैं; कानों के पास उन वेवलेंथों में, जो आवाज को एक विशिष्ट फ्रीक्वेंसी सीमा में ले जाती हैं, विषमता पहचानने की क्षमता है; त्वचा के ग्रहीता (रिसेप्टर) आपको उर्जा को गर्मी के रूप में भांपने की क्षमता देते हैं, और, आपको तापमान की परिवर्तनशीलता में अंतर महसूस करने की क्षमता देते हैं जो, परिणाम-स्वरूप आपको एक आरामदायक शारीरिक तापमान बनाये रखने में सहायता करता है और आपके ताप को कम होने से और गर्मी से थकान होने से रोकता है. आपकी त्वचा के स्पर्श ग्रहीता (टच रिसेप्टर) आपको विषमता का अनुभव बुनावट, दबाव, कंपन, और दर्द का पता लगा कर कराते हैं; आपकी जिव्हा के स्वाद ग्रहीता (टेस्ट रिसेप्टर) आपको पांच तरह के स्वादों की विषमता में भेद करने देते हैं – नमकीन, खट्टा, कड़वा, मीठा, और खुशबूदार. आपकी नाक में सूंघने वाले ग्रहीता(ऑलफैक्ट्री रिसेप्टर) हवा में बूँदों का पता लगाते है और आपको अलग-अलग गंधों में फर्क करने में सहायता करते हैं.”

रिक्की ने, ध्यान से सुनते हुए, कहा,”हम्म....मैंने वास्तव में इसके बारे में कभी ऐसे नहीं सोचा था.”

“बहुत से लोगों ने नहीं सोचा.”

“इस संवेदी तंत्र से संयुक्त इकट्ठी की गई सूचना जुड़ कर अनुभवों का एक बहुरूपदर्शक बन जाता है जो आपको भौतिक संसार को कई दृष्टिकोणों से समझने में सक्षम करता है.

“अब, आपके शरीर की जो बुनियादी जरूरतें उसे ढंग से कार्य करने के लिये चाहिए उनमें रौशनी, गुरुत्वाकर्षण, नींद, आराम, पानी और पोषण हैं. यह, बेशक, तुम्हे स्पष्ट है, लेकिन फिर भी मुझे इन पहलुओं पर संक्षिप्त में टिपण्णी करनी है.

“तुम्हारा शरीर, और वास्तव में धरती की सतह पर सारा जीवन, सूर्य की रौशनी से जीवित रहता है. अगर सूर्य की रौशनी को अचानक ही बंद कर दिया जाये, तो धरती की सतह पर सारा जीवन 8.3 मिनटों के बाद नष्ट हो जायेगा, जितना समय रौशनी के कण सूर्य से आने के लिये लगभग 30 लाख मीटर प्रति सेकेण्ड की गति से लेते है.”

“ओह. वह एक अतिशीघ्र अंत होगा.”

“हाँ, लेकिन भाग्य से यह ऐसा कुछ है जिसके बारे में तुम्हे चिंता करने की आश्यकता नहीं है. लेकिन तुम्हारे शरीर पर रौशनी का असर अनगिनित तरीकों से पड़ता है; सबसे स्पष्ट वह है कि अब अँधेरा होता है तो तुम देख नहीं पाते, इसलिये रात में इधर-उधर जाने की तुम्हारी क्षमता बहुत अधिक कम हो जाती है. सूर्य की रौशनी आपके शरीर को विटामिन डी बनाने के लिये प्रेरित करती है, जो आपके शरीर के लिये आवश्यक पदार्थ है. यह आपके दिमाग में न्यूरोकेमिकल रिएक्शन को भी अभिप्रेरित करती है जो आपकी मनोदशा के निर्धारण के लिये बहुत महत्वपूर्ण है. इसीलिये ऐसा होता है कि सार्दियों के दिनों में कुछ लोग उदास महसूस करना प्रारंभ कर देते हैं.”

“मैं कुछ लोगों को जानता हूँ जो सर्दी के अँधेरे महीनों में हमेशा ही उदास महसूस करते हैं.”

“हाँ, यह एक बहुत ही सामान्य समस्या है. सूर्य की रौशनी, या चमकती हुई रौशनी, उनके लिये अति-उत्तम इलाज है.”

“गुरुत्वाकर्षण एक और ऐसा महत्वपूर्ण लक्षण जो शरीर पर असर करता है.”

“एक गुरुत्व बल सभी पदार्थों पर कार्य करता है, इन्हें तुम्हारे ग्रह की ओर नीचे की तरफ खींचता है. तुम्हारे शरीर को बड़ा होने और ढंग से कार्य करने के लिये इस बल की जरूरत होती है. यदि गुरुत्वाकर्षण के कारण नहीं होता, तो तुम ग्रह की सतह पर चल नहीं पाते या नियमित व्यायाम के द्वारा अपने शरीर को स्वास्थ्य नहीं रख पाते. गुरुत्वाकर्षण बल ग्रह को घेरे हुए एक अदृश्य क्षेत्र के अंदर होता है, और जैसे-जैसे आप धरती से दूर जाते हैं इसकी तीव्रता नष्ट और कम होती जाती है.

“अंत में, नींद, आराम, पानी, और पोषण भी शरीर के ढंग से कार्य करने के लिये अनिवार्य हैं.”

“तुम्हारे शरीर ने रौशनी के अनुकूलन के लिये घुमावदार लय विकसित की है, जहाँ यह एक ऐसा हॉर्मोन बनाता है जो नींद को प्रेरित करता है और जब अँधेरा हो जाता है तो इसे आराम करने के लिये मजबूर करता है. जब रौशनी लौटती है तो शरीर एक दूसरा हॉर्मोन बनाता है, इसे जगाता है और दिन भर इसे फुर्तीला बनाये रखता है. नींद के दौरान, आपका शरीर आराम करता है और उसे वापिस पहले वाली दशा में ले कर आता है. नींद का दूसरा सुविधाजनक प्रतिफल यह है कि जब तुम्हारा शरीर सो रहा होता है, तो तुम्हारी आत्मा तुम्हारे शरीर को छोड़ सकती है और दूसरा कार्य कर सकती है. जब तुम्हारा शरीर सो रहा होता है तो तुम्हारी आत्मा की गतिविधि सुबह उठने पर एक विकृत रूप में सपनों की भान्ति याद आती है. और अंत में, तुम्हारे शरीर को, बेशक, नियमित अंतरालों पर समुचित पानी और पोषण मिलना चाहिये ताकि यह ढंग से कार्य कर सके.”

रिक्की ने सपनों का विषय उठाते हुए कहा, “मेरा शरीर जब सो रहा होता है तो मैं दूसरे आयामों की यात्रा का आनन्द उठाता हूँ.”

“हां, मैं जानता हूँ. तुम इस रोमांच की अपनी यादों को एक ऐसे तकनीक, जिसे ‘स्पष्ट सपने देखना’ कहते हैं, का प्रयोग करके बढ़ा सकते हो, लेकिन वह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हम बाद में चर्चा कर सकते हैं.”

पुरानी आत्मा जारी रही, “अब जब मैंने संक्षिप्त में समीक्षा कर ली है कि तुम्हारा शरीर अपने चारों और की वस्तुओं को कैसे देखता है और इसके रखरखाव के लिये इसे किस चीज की आवश्यकता है, आओ हम कुछ शारीरिक विकलांगताओं को भी देखें जिनसे धरती पर तुम्हे संधर्ष करना होगा. पहले हम जलवायु को लेते हैं.

“जलवायु और समयानुकूल मौसम ढाँचे वह कारक हैं जो तुम्हारे शरीर को वातावरणीय परिस्थितियों के साथ अनुकूलन करने के लिये और मौसम और ऋतु की विपरीतता को ध्यान में रख कर अपनी गतिविधियों को नियोजित करने के लिये मजबूर करते हैं.

“तुम धरती के अपनी घुर्री पर प्रत्येक चौबीस घंटे धूमने के कारण इसके प्रभाव को अनुभव करते हो, और, जैसे-जैसे यह घूमती है, बहुत से क्षेत्रों की दिन की रौशनी पर असर पड़ता है और सूर्य की रौशनी से उत्पन्न गर्मी से तापमान में उतार-चढ़ाव आते हैं. इससे वायुमंडल में हलचल पैदा होती है जो मौसम के स्वरूप पर और साथ ही साथ समुद्र की लहरों पर प्रभाव डालता है, और यह अक्सर ग्रह पर मनुष्य की गतिविधि में रुकावट डालते हैं. इसके अतिरिक्त, क्योंकि धरती अपनी कक्षा में सूर्य के इर्द-गिर्द प्रत्येक 365 दिन में धूमती है और अपनी घुर्री पर अपनी परिक्रमा के प्लेन की तुलना में झुकी हुई होती है, तुम मौसमी जलवायु परिवर्तन देखते हो. यह मौसमी जलवायु परिवर्तन और भी विशिष्ट हो जाते हैं जैसे-जैसे तुम ग्रह के उन क्षेत्रों की ओर जाते हो जो मध्य-रेखा से दूर होते जाते हैं, जैसे यहाँ आइसलैंड में. उत्तरी गोलार्ध में मई, जून और जुलाई में सूर्य की रौशनी अधिक होती है क्योंकि यह गोलार्ध उस समय सूर्य के सामने होता है, जबकि नवम्बर, दिसंबर और जनवरी में दक्षिणी गोलार्ध सूर्य के सामने होता है और उसे सूर्य की रौशनी मिलती है, जबकि ज्यादातर समय यहाँ अँधेरा होता है. तुम, बेशक, अपने वातावरण के इस पहलू को स्वीकार करते हो और अपनी गतिविधियों को वैसे ही नियोजित करते हो.”


“हरके चीज के लिये एक मौसम है,
और स्वर्ग के नीचे हरेक उद्देश्य का एक समय है”
एकक्लेसिअसटेस 3:1

पुरानी आत्मा ने जारी रखा, “एक ओर अतिरिक्त चुनौती है जिसे मैं इस समय बताऊँगा, यद्दपि यह तुम्हारे शरीर के मुकाबले तुम्हारी आत्मा से ज्यादा सम्बन्धित है. इसका सम्बन्ध एक परेशान करने वाले काम से है जिसमें तम्हारी आत्मा को तुम्हारे शरीर को धरती पर स्थान/समय के आयाम में इधर-उधर ले जाने के लिये करना पड़ता है.”

“तुम इस उदहारण को थोड़ा ज्यादा दिलचस्प पाओगे. स्थान और समय के आयाम तुम्हे एक दूसरे से स्वतंत्र प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में वह एक साथ गुंथे हुए हैं. मैं उन्हें ‘स्थान/समय’ कहूँगा. स्थान/समय भौतिक संसार का वह पहलू है जो सभी आत्माओं के लिये एक चुनौती है जब वह अवतरित होती हैं, क्योंकि आध्यात्मिक आयाम में इन आयामों का अस्तित्व एक साथ नहीं होता है, केवल स्थान है पर समय नहीं है. इस अनुभव के बहुत से पहलू हैं जिनके बारे में हम बात कर सकते हैं, लेकिन इस समय थोड़े से ही बताऊँगा.

“जैसे कि, भौतिक शरीर के अंदर फंसी हुई एक आत्मा को जो समझौता करना पड़ता है वह आसान नहीं है. आध्यात्मिक आयाम में तुम ‘विचार’ के अभ्यस्त होते हो और तत्काल ही नए स्थान पर ‘होने’ के, लेकिन धरती पर तुम्हे दूर के स्थान पर किसी व्यक्ति से बात करने के लिये या तो टेलिफोन करना पड़ता है या अपने भौतिक शरीर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिये ‘स्थान’ से गुजरना पड़ता है. तुम्हारे ‘विचार’, हालांकि, तत्काल ही जा पायेंगें और उसे मिल जायेंगें जिसे तुम भेजोगे, बशर्ते वह व्यक्ति दूरसंवेदी का ग्राही हो, लेकिन आध्यात्मिक आयाम की तरह, धरती पर बातचीत करने का यह विश्वसनीय तरीका नहीं है. स्थान/समय से संधर्ष करना इकलौता परेशान करने वाला अनुभव है जो तुम्हारी आत्मा को तुम्हारे अवतरण के दौरान होगा, और मैं इस बारे में बहुत कुछ और बाद में बताऊंगा.”


एक मिनट कितना लम्बा है, यह उस पर निर्भर करता है
कि आप स्नानघर के दरवाजे के किस ओर हैं.
जाल का नियम

“मुझे अब समझ में आया कि मैं अक्सर क्यों परेशान हो जाता हूँ जब मैं वहाँ नहीं पहुँच पाता जहाँ मैं जल्दी-जल्दी जाना चाहता हूँ”

“हाँ....जैसा तुम जानते हो, समय के अनिवार्यत: दो पहलू होते हैं जिनका तुम अभी अनुभव करते हो. एक तरफ तुम्हारी ‘घड़ी’ का समय है (जो धरती के अपनी घुर्री पर एक बार घूमने से निकाला गया, 24 घंटो के खंडों में बांटा गया है; प्रत्येक घंटा साथ मिनटों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक मिनट साठ सेकंडों में विभाजित किया गया है), और दूसरी ओर, समय गुजरने का तुम्हारा व्यक्तिगत अनुभव. जैसा कि तुम जानते हो, तुम बार-बार इस समय के ढाँचे में एक-दूसरे के साथ मतभेद अनुभव करते हो. परन्तु, तुम यदि धरती पर प्रभावपूर्ण ढंग से संचालन करना चाहते हो, तो तुम्हे अपने जीवन को घड़ी के समय के अनुसार नियोजित करना आना चाहिए, क्योंकि तुम तब तक उन्नति नहीं कर पाओगे जब तक तुम, उदहारण के लिये, मुलाकातों, काम के लिये, या बस या रेलगाड़ी, इत्यादि पकड़ने के लिये घड़ी के समय के अनुसार नहीं चलोगे. मुश्किल यह है कि समय व्यतीत होने का आपका व्यक्तिगत अनुभव अक्सर घड़ी के समय के अनुसार नहीं होता. कभी-कभी, तुम्हे इसके तेज होने का अनुभव होगा और किसी दूसरे समय आहिस्ता होने का अनुभव होगा, घड़ी के समय के मुकाबले. उदाहरण के लिये, तुम्हारी टिप्पणी के उत्तर में – जब तुम्हे कहीं जाने की जल्दी होती है, तुम्हारा व्यक्तिगत अनुभव समय के धीरे व्यतीत होने का होता है और तुम्हे यह महसूस होता है कि अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिये चिरकाल लग जाएगा. जबकि यदि तुम किसी गतिविधि में डूबे हुए हो, जैसे कि अपना गृहकार्य कर रहे हो, तो तुम्हारा समय गुजरने का अनुभव घड़ी के मुकाबले तेज होगा.

“समय के साथ समझौता करने में मुख्य समस्या यह है कि कभी-कभी तुम्हे यह लगता है कि तुम्हारे पास इसके प्रभाव को नकारने के लिये अवसर है, भौतिक संसार की उन विशेषताओं से भिन्न जो तुम मानते हो कि तुम्हारे नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हैं, जैसे कि गुरुत्वाकर्षण, मौसम के ढाँचे, और धरती का अपनी घुर्री पर घूमना और सूर्य के आसपास परिक्रमा करना, इत्यादि. यह अनुभूति कि तुम्हे समय के प्रभाव के कारक को नहीं लेना है धरती पर स्थानिक है और जीवन पर अनकहे तरीकों से नकारात्मक प्रभाव डालता है, विशेषतया लोगों को परेशान महसूस होने में और स्वयं पर, दूसरों पर, और अनगिनित स्थितियों पर, जो जीवन की नैया को पार करने में उत्पन्न हो सकती हैं, क्रोधित होने से.

“मुझे इस मुद्दे पर, कि जब लोग स्थान/समय को नकारते हैं तो वह कैसे प्रभावित होते हैं, और भी बहुत कुछ कहना है.”

रिक्की ने सिर हिलाया, “ठीक है...मैं समझता हूँ.”

“अब मैंने प्राथमिक शब्दों में वर्णन किया है कि कैसे ब्रहमांड की रचना हुई और यह कैसे चलता है. मैंने इसका वर्णन भी किया कि कैसे संवेदनशील मनुष्यों की रचना होती है और भौतिक शरीर के बुनियादी पहलू, इस पर जलवायु और स्थान/समय के कुछ प्रतिबंधों का भी वर्णन किया है.

“अब मुझे तुम्हे इस बात को विस्तार से बताने की कोशिश करनी है कि मानव शरीर का प्रयोग करके कैसे हम अपनी वास्तविकता को रचते हैं.”

[क्रमशः........(अगले अंक में पढ़ें "आप स्वयं अपनी वास्तविकता की रचना करते हैं")]

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com