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साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



सुविख्यात कवि शिव कुमार अर्चन
और जयप्रकाश श्रीवास्तव का
साहित्यकारों ने किया अभिनंदन

विशाल शुक्ला



छिन्दवाड़ा - साहित्य जगत में अपनी काव्य प्रतिभा के जरिये देश भर में चर्चित कवि शिव कुमार अर्चन और उनके अनुज जयप्रकाश श्रीवास्तव के छिन्दवाड़ा आगमन पर साहित्यिक संस्थाएं पाठक मंच, मध्यप्रदेश आंचलिक साहित्यकार परिषद, बुंदेलखंड साहित्य परिषद, ने अपने संयुक्त तत्वावधान में बुंदेलखंड साहित्य परिषद के अध्यक्ष पी दयाल श्रीवास्तव के सत्यम सुंदरम नगर निवास में काव्य गोष्ठी आयोजन कर उनका साल श्रीफल और स्थानीय साहित्यकारों की काव्य कृतियाँ भेंट करते हुए हार्दिक अभिनंदन किया! कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंगकार डॉक्टर कौशल किशोर श्रीवास्तव ने की तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुविख्यात कवि शिवकुमार अर्चन और विशिष्ट अतिथि जय प्रकाश श्रीवास्तव थे! कार्यक्रम का संचालन मध्यप्रदेश आंचलिक साहित्य परिषद के अध्यक्ष शिव शंकर शुक्ल ने किया ! कार्यक्रम के प्रारम्भ में पाठक मंच के संयोजक युवा कवि विशाल शुक्ल ने अतिथियों का परिचय दिया वहीँ कवि राजेन्द्र यादव ने काव्य गोष्ठि का आगाज करते हुए पहली रचना पढ़ी

सूनी है घर की दीवारे सूना घर का कोना कोना!
याद हमें आता है अक्सर बूढ़ी माँ का अलग बिछोना


कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुये कवि रामलाल सराठे रश्मि ने अपनी रचना पढ़ी!

जय हिंद लिखो यशगान लिखो युगजननी का यशगान लिखो
अभिमान करें सब जनम जनम कवि ऐसा हिंदुस्तान लिखो


ग्रामीण परिवेश के काव्य के माध्यम से चित्रण करते हुए कवि अवधेश तिवारी ने अपनी कविता पढ़ी!

तन्नक सो पैसा मिलो तो खोदन लगे पहाड़
उचकन लगे मेंदरा जैसई आओ असाढ़
करलय वेद पुरान को कोरो सुग्गा पाठ
बेटा अपने ज्ञान खें बैठो बैठो चाट


कवि रमाकांत पांडेय ने अपनी पंक्तियों से ध्यान खींचा

तुम सुरीली तान हिय की मैं अनवरत साधना हूँ
तुम सदा आराध्य मेरे मैं सतत आराधना हूँ


कवि नंद कुमार दीक्षित ने चिंतन देते हुए पढ़ा

मैंने जब भी पूछा हथेलियों से
तुमने कभी गिरे हुए लोगो को उठाया है
किसी व्यक्ति को सहारा दिया है
किसी के आंसुओं को हथेलियों पर सजाया है

युवा कवि विशाल शुक्ल ने अपनी प्रतिनिधि रचना पढ़ी



शत शत नमन तेरे त्याग और साहस को
तेरे कारण काली रात भी उजाली है

राकेश राज ने लोगो का ध्यान खींचा

झूठ छल कपट बन गए जीवन का आधार
अब तो सच्चा प्यार भी बन बैठा व्यापार


बाल कविताओं के जरिये चर्चित कवि पी दयाल श्रीवास्तव ने अपनी कविता से जीने का अंदाज सिखाया

बहुत देर चुप थे जरा गुन गुनाओं
अरे ! भाई थोड़ा हंसो मुस्कराओ


मंच संचालन कर रहे कवि शिव शंकर शुक्ल ने अपने व्यंग के माध्यम से प्रहार किया

हम शोषक है तुम शोषत हो बात नही बेमानी है
प्रजातंत्र में तुम्ही दूध हो दूध मिले हम पानी है


इस यादगार कार्यक्रम के अंतिम चरण कार्यक्रम अध्यक्ष डॉक्टर कौशल किशोर श्रीवास्तव ने अपनी गजलों और कविताओं से जहाँ मंच को ऊंचाइयां प्रदान की वही कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जयप्रकाश श्रीवास्तव ने अपने गीत ओ चिड़िया तटों को ना लांघना पढ़कर कार्यकम को सफलता के सोपान पर चढ़ाया!कार्यक्रम के अन्तिम कवि के रूप में मुख्य अतिथि कवि शिवकुमार अर्चन ने अपनी व्यंग क्षणिकाओं

जूते में निकली कील
पूछ रही और कितने मील


से बात प्रारम्भ करते हुए अपने सुमधुर गीतों से समां बाँधा! आभार प्रदर्शन पी दयाल श्रीवास्तव ने किया!
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