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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



आधारकार्ड के लिन्केज


डाॅ. कौशल किशोर श्रीवास्तव


मालूम नहीं किसके आदेशों से आधार कार्ड को मोबाइल, बैंक एकाउंट, पेन्षन इत्यादि से जोड़ा जाना आवष्यक बनाया जा रहा है जबकि स्वयं आधार कार्ड के पृष्ठ पर लिखा गया है कि इसकी कानूनी कीमत नहीं है।

जब मैं आधार कार्ड को मोबाइल से लिन्क करवाने पहुंचा तब संदेश आया कि मेरी उंगलियों के छाप आधार कार्ड की उंगलियों से नहीं मिल रहे हैं। उसी मोबाइल के दुकानदार ने बतलाया कि मुझे नई उंगलियों की छाप से आधार कार्ड को लिंक करवाना पड़ेगा। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने तो पढ़ा था कि उंगलियों के छाप कभी नहीं बदलते।

जब मैं आधार कार्ड की दुकान पर गया तो मेरे जैसे कई लोगों की भीड़ वहां पर खड़ी हुई थी। सब बूढ़े लोग थे। वहां न बैठने को कुर्सी थी न ही कोई पंखा था। बहुत गर्मी थी। उस छः फीट x दस फीट के कमरे में, दुकान पर बैठा लड़का हरेक व्यक्ति से 150/- ले रहा था।

शासन के इन आदेशों से हम बूढे लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है। जिस कार्ड की कोई कानूनी कीमत नहीं है, उसे कैसे कानूनी दस्तावेजों के साथ आवश्यक रूप से संलग्न करवाया जा सकता है। बरहहाल लगभग पन्द्रह दिन बाद मुझे समाचार मिला कि मेरी नयी उंगलियांे की छाप आधार कार्ड से लिन्क हो गई है।

जब मैं मोबाइल की दुकान पर गया तो मेरी फिंगर प्रिंट की छाप आधार कार्ड से मिलवाई गई। तब जाकर केवल बायें हाथ की मध्यमा की छाप ही आधार कार्ड से मिल रही है बरहहाल मेरा मोबाइल बन्द नहीं हुआ।

दिनांक 02/11/17 को मैं पेंशन के लिये जीवन प्रमाण पत्र देने पहुंचा तो फिर उंगलियों की छाप को आधार कार्ड से मिलवाया गया। मालूम पड़ा कि उंगलियों की छाप आधार कार्ड से नहीं मिल रही है। बड़ी मशक्कत के बाद एक उंगली की छाप मिल पाई। शासन को सर्वेक्षण करवाना चाहिये कि कितने प्रतिशत लोगों की छाप कितने सालों बाद बदल जाती है या घिस जाती है।

मैं सामने खड़ा हूँ। आधार कार्ड का चित्र मुझसे मिल रहा है। मेरा ‘वोटर आई डी’, आधार कार्ड से मिल रहा है। मगर मेरी घिसी हुई उंगलियों की छाप आधार कार्ड से नहीं मिल रही है तो क्या मुझे पेन्शन के मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया जायेगा? क्या मेरे जिन्दा रहते हुये भी केवल उंगलियों की छाप बदल जाने से आजीवन पेन्शन नहीं मिलेगी। और वह भी उस कार्ड के कारण जिस पर स्वयं लिखा है कि उसकी कोई कानूनी कीमत नहीं है। या मुझे हर साल आधार कार्ड बनवाने वाले को मुद्रा देते रहना पडे़गी। आधार कार्ड को हर मौद्रिक लेनदेन से संलग्न करना उचित है। कई ऐसे प्रकरण सामने आये हैं जिसमेें पेन्शनर की मृत्यु हो चुकी होती है पर उसके

रिश्तेदार उसकी पेन्शन लेते रहते हैं। ऐसी धोखाधड़ी के प्रकरणों को आधार कार्ड से ‘लिन्क’ करके ऐसी धोखाधड़ी को रोका जा सकता है पर बदलते या घिसते उंगलियों की छाप का भी कोई निदान ढूंढा जाना चाहिये।

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