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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



मिलेगा भात


सुशील शर्मा


(बांग्लादेश के एक कवि की
लिखी कविता "भात दे हरामजादे"
के प्रतिउत्तर में लिखी कविता)

तुझे भात चाहिए प्यारे
तो तुझे एक काम करना है।
सीखना है इंसानियत
करना अपनों से प्यार
आतंकी जेहनियत से दूर
छोड़नी है बलात्कारी मानसिकता।
बम और भात
कैसे एक साथ
दूसरों के रहमोकरम पर
रहोगे कब तक जिंदा।
घुसपैठ कर कर के
कब तक करोगे 
अपनी आत्मा को शर्मिंदा
निगलना हो तो पहले
अपनी बर्बरता को निगलो
भात से ऊपर उठकर 
अपनी मानसिकता को बदलो
अपने वहशीपन को एक
कोने में छुपाकर आओ
प्यार से मांगो
झुककर मांगो
अपनी आदमियत को
अपने चेहरे पर टांगो।
वर्ना नही मिलेगा
भात।
हां तशरीफ़ पर जरूर पड़ेगी
एक लात।
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